डॉ. कादंबरी बोस — एक ऐसी लड़की जो अपने पेशे के लिए जीती है। न डर, न लालच… बस एक ज़िद—मरीज को बचाने की। लेकिन ये अस्पताल नहीं…ये माफिया की कैद है। उसे अगवा किया गया है एक ऐसे मरीज के इलाज के लिए, जिसकी सांसें किसी अंडरवर्ल्ड साम्राज्य का भविष्य तय करेंगी। और इस खेल का सबसे खतरनाक नाम है—तनिष्क बराला। माफिया का वो लीडर,जिसकी एक नज़र मौत का हुक्म बन जाती है।आर्डर साफ़ है—इलाज के बाद डॉक्टर को खत्म कर देना। लेकिन…मसला ये है कि कादंबरी डरती नहीं। वो झुकती नहीं।और उसकी आंखों की मासूम सच्चाई— तनिष्क की रूह तक को चीर देती है। “तुम जानती हो, इलाज के बाद तुम्हारी सांसें मेरी मर्ज़ी पर होंगी?” कादंबरी ने हिम्मत से कहा.. चाहे तो मेरी जान ले लो लेकिन मेरे मरने के बाद.. तुम्हें अपनी सांसे पूछ लगने लगेगी ।” जिस पल तनिष्क की बंदूक कादंबरी के सीने से लगती है, उसी पल उसे एहसास होता है—ये लड़की उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन चुकी है।और उसी पल— तनिष्क समझ जाता है…ये सिर्फ़ एक सौदा नहीं है। ये उसकी तबाही है। ये कहानी है—मोहब्बत और मौत के बीच फंसी एक औरत की। और उस आदमी की, जिसे प्यार हो गया उसी से… जिसे मारना था।

कम होने के बाद डॉक्टर को मार डालना
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Mr. Arrogant
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भुक्कड़ डॉक्टर
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पेशेंट की हालत क्रिटिकल है
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रात में अगर तुम्हें चिल्लाते हुए सुना तो तुम्हारे इस कमरे में खूँखार भोंकने वाले कुत्ते छोड़ दूँगा।"
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तब तक थप्पड़ मारे जाएं, जब तक उसका गाल बंदर के पिछवाड़े जैसा लाल हो जाए
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