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देविका ने चीटिंग की है

यूरोप, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी…

सारी यूनिवर्सिटी में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी, क्योंकि आज यहाँ पर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स का लास्ट एग्जाम था और सब लोग एग्जामिनेशन हॉल में बैठे हुए थे। वहीं देविका भी अपने हॉल में बैठी हुई अपना एग्जाम कंप्लीट कर रही थी।

उसने अपने एग्जाम के लिए बहुत मेहनत की थी। आखिर, यही तो वो चीज थी जिसकी वजह से उसने अपने भाई की शादी भी मिस की थी। तो वो इसे ऐसे कैसे छोड़ सकती थी? इसीलिए वो दिल लगाकर अपना पेपर लिख रही थी, ताकि वो जल्द से जल्द अपना एग्जाम क्लियर करे और फिर वापस इंडिया चली जाए। वहीं, इस यूनिवर्सिटी के एक बिल्डिंग छोड़कर दूसरे बिल्डिंग के एग्जामिनेशन हॉल में, सार्थक भी अपना एग्जाम क्लियर कर रहा था।

सार्थक और देविका ने डिसाइड किया था कि एग्जाम के बाद वो लोग लॉन्ग ड्राइव पर जाएँगे और यूरोप में अपने आखिरी दिनों को बहुत ही यादगार तरीके से सेलिब्रेट करेंगे। ये उनके लिए एक बहुत ही अच्छा फेयरवेल गिफ्ट होगा, क्योंकि उसके बाद वो दोनों वापस इंडिया चले जाएँगे। वहाँ पर अपनी फैमिली, फ्रेंड्स और अपने करियर पर फोकस कर लेंगे। प्यार, इश्क, मोहब्बत अपनी जगह है,और प्यार से पेट थोड़ी भरता है ।इसलिए वो दोनों सारी जिंदगी एक-दूसरे के साथ रहें और एक-दूसरे को प्यार करें, इसके लिए उनको ये आखिरी सबसे ज़रूरी इम्तिहान तो देना ही पड़ेगा ताकि वो अपना अच्छा करियर भी बना सके ।

सारी यूनिवर्सिटी के बच्चे अपने-अपने एग्जाम लिखने में व्यस्त थे ।वहीं देविका भी हॉल में बैठी एग्जाम दे रही थी। उसी के दो सीट आगे एक लड़का बैठा हुआ था, जिसने पूरे साल एग्जाम की कोई तैयारी नहीं की थी और न ही उसका एग्जाम अच्छे से जा रहा था। वो इतना ज्यादा परेशान हो गया था कि अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे।

वहीं देविका की एक पुरानी आदत थी। वो कभी-कभी कुछ हिडन आंसर अपने क्वेश्चन सीट पर भी लिख देती थी, या फिर जो इंपॉर्टेंट होता उसे मार्क करके रख देती थी। ये आदत उसकी अभी भी थी। उसे एग्जाम इतनी अच्छी तरह से आता था कि उसने आंसर के कुछ हिस्से अपनी क्वेश्चन सीट पर भी लिख दिए। और यही चीज उस लड़के ने देख भी ली। पर क्योंकि यहाँ पर रूल्स थोड़े स्ट्रिक्ट थे, तो इसके लिए वो लड़का चीटिंग नहीं कर सकता था। पर अब उसका एग्जाम अच्छा नहीं जा रहा था, तो उसे कुछ न कुछ तो करना ही था ना।

इसलिए उस बदमाश लड़के ने सोचा कि कुछ भी करके उसे देविका की क्वेश्चन सीट हासिल करनी है, जिससे कि उसे कुछ आंसर्स मिल सकें।

उसने हल्का सा तिरछा होकर पीछे देखा था। तो एग्जामिनर ने डेस्क पर जोर से मारते हुए यूरोपीय इंग्लिश स्टाइल में कहा, "साइलेंस! सब अपनी अपनी जगह पर सीधे बैठेंगे। जरा सा भी इधर-उधर चेहरा घुमाया तो मैं एग्जाम कैंसिल कर दूँगा।"

देविका ने एक नजर एग्जामिनर की तरफ देखा और फिर अपना आंसर लिखने लगी। वो तो कुछ कर भी नहीं रही थी, चुपचाप अपना पेपर ही कंप्लीट कर रही थी। पर उसके आगे बैठा लड़का नोहा वो कहाँ बाज़ आने वाला था? वो अपना भी फ्यूचर खराब करता और अपने साथ-साथ बाकी स्टूडेंट का भी फ्यूचर खराब करता।

उसने अपने जेब से एक कॉइन निकाला और धीरे से अपने टेबल के नीचे से उस कॉइन को दरवाजे की तरफ उछाल दिया। जिससे वो कॉइन सीधे दरवाजे पर जाकर लगती है और इससे ऐसी आहट आती है कि दरवाजे के उस तरफ कोई खड़ा है, जिसने अभी-अभी दस्तक दी है। एग्जामिनर खड़ा होता है और दरवाजा खोलकर बाहर की तरफ देखता है कि आवाज किसने दी है। पर जब उन्हें कोई नहीं दिखता तो प्रोफेसर थोड़े हैरान होते हैं। बस उतना ही समय था। नोहा तुरंत पीछे घूमता है और अपना हाथ बढ़ाकर देविका के डेस्क से उसकी क्वेश्चन शीट ले लेता है। ये सब इतनी जल्दी हुआ कि देविका को समझ ही नहीं आया। वो तो आराम से अपना पेपर कर रही थी, उसके हाथ के नीचे से एकदम से क्वेश्चन सीट छीन ली गई। जिसे देखकर वो हैरान हो गई। उसने गुस्से में उस लड़के की तरफ देखा।

पर उस लड़के ने देविका को पूरी तरह से इग्नोर कर दिया और उसकी क्वेश्चन शीट को अपनी क्वेश्चन शीट के अंदर छुपा लिया।

देविका गुस्से में उसे यूरोपियन इंग्लिश स्टाइल में रहती है, "नोहा ये क्या बदतमीजी है? क्वेश्चन पेपर वापस करो मेरा!"

पर उसने कोई रिएक्शन नहीं किया। और अब तक एग्जामिनर भी दरवाजा बंद करके अपनी जगह पर आ गए थे। प्रोफेसर ने जब देविका को देखा तो गुस्से में चिल्लाते हुए कहा, "क्या कर रही हो तुम? खड़ी हो जाओ अपनी जगह से!"

देविका घबराकर खड़ी होती है। अब क्लास में हर किसी की नजर देविका के ऊपर ही थी और वहीं नोहा मन ही मन मुस्कुरा रहा था। क्योंकि अब तो देविका का एग्जाम कैंसिल हो जाएगा और उसे एग्जामिनेशन हॉल से बाहर निकाल दिया जाएगा।

प्रोफेसर गुस्से में देविका के ऊपर चिल्लाकर कहते हैं, "तुम चीटिंग कर रही थी ना? पूछ रही थी ना सामने वाले से?" देविका जल्दी से कहती है, "नहीं सर, मैंने इसे कुछ नहीं पूछा है। बल्कि इसने चीटिंग की है, इसने मेरा क्वेश्चन पेपर ले लिया है।"

प्रोफेसर नोहा की तरफ देखते हैं। नोहा जल्दी से अपना हाथ खड़ा करते हुए बोला, "नहीं सर, मेरे पास मेरा क्वेश्चन पेपर है। मुझे नहीं पता ये क्या कह रही है। मैं देख रहा हूँ बहुत देर से, ये मुझे परेशान कर रही थी। मैं तो आराम से अपना एग्जाम कर रहा हूँ, लेकिन इस लड़की को कुछ नहीं आता है। इसलिए ये बहुत देर से मुझे परेशान कर रही थी। मेरे पास मेरा अपना क्वेश्चन पेपर है, आप देख लीजिए। ये मेरा अपना क्वेश्चन पेपर है।"

प्रोफेसर उन दोनों के पास आता है। क्लास में अब अजीब सी घबराहट का माहौल हो गया था, क्योंकि ये प्रोफेसर बहुत ही ज्यादा स्ट्रिक्ट थे। किसी को भी एग्जामिनेशन हॉल से बाहर निकाल देते और किसी को भी पनिशमेंट दे देते। उनकी क्लास हमेशा से ही उनसे डरती रही है। प्रोफेसर गुस्से में उनके पास आता है और नोहा से कहता है, "अपना क्वेश्चन पेपर दिखाओ।" नोहा ने अपना क्वेश्चन पेपर दिखाया और प्रोफेसर ने ये देखते हुए देविका से कहा, "ये तो इसका क्वेश्चन पेपर है।" लेकिन देविका हैरान हो जाती है। उसने जब उस क्वेश्चन पेपर की तरफ देखा तो उसमें नोहा का नाम लिखा हुआ था। उसने क्वेश्चन पेपर लेने के साथ ही सबसे पहले अपना नाम लिख दिया।

देविका के चेहरे पर घबराहट आ गई। तो वहीं नोहा कहता है, "सर, एग्जाम का टाइम निकला जा रहा है। आपको जो भी एक्शन लेना है, आप बाहर जाकर लीजिए, मुझे मेरा पेपर देने दीजिए।" पर देविका तुरंत रहती है, "सर, ये मेरा क्वेश्चन पेपर है,पर इसमें इसने अपना नाम लिखा है। अब आप ही बताइए, ये क्वेश्चन पेपर इसका है तो फिर मेरा पेपर कहाँ है? मेरे पास भी तो ये क्वेश्चन पेपर होना चाहिए ना?"

प्रोफेसर ने हाँ में हिलाते हुए कहा, "हाँ, तुम्हारे पास भी तो क्वेश्चन पेपर होना चाहिए…" ये कहते हुए उन्होंने देविका के सारे आंसर शीट को पलटना शुरू कर दिया। जैसे ही उसने सारी आंसर शीट पलटी, लास्ट में से उसका क्वेश्चन पेपर नीचे जमीन पर गिर जाता है। देविका हैरान हो जाती है। ये उसका क्वेश्चन पेपर नहीं है, ये नोहा का है, क्योंकि इसके अंदर फूल के डिजाइन बने हुए हैं। वो यहाँ पर एग्जाम देने आई है, न कि ड्राइंग बनाने के लिए। ये सारे काम उसी के हैं और उसी ने अपना पेपर देविका से बदल दिया है। वो घबराते हुए कहती है, "सर, ये झूठ बोल रहा है। ये मेरा पेपर नहीं है, इसी का है। और आपके हाथ में जो क्वेश्चन पेपर है, वो मेरा पेपर है। प्लीज, मुझे मेरा पेपर वापस दीजिए।"

ये सब देखकर तो अब क्लास में भी बच्चे शोर मचाने लगे कि उनके एग्जाम का टाइम खराब हो रहा है और अगर ये सब करना है तो क्लास के बाहर जाएँ।

नोहा ने मौके का फायदा उठाया और प्रोफेसर के हाथ से देविका की क्वेश्चन शीट छीनते हुए कहा, "सर, प्लीज हमारा एग्जाम खराब मत कीजिए। हमने पूरे साल बहुत मेहनत की है और ये पेपर हमारे लिए बहुत मायने रखता है। इस लड़की को कुछ नहीं आता है, ये तो अपने बॉयफ्रेंड के साथ रेस करने में बिजी रहती है। पूरी यूनिवर्सिटी जानती है इसके और इसके बॉयफ्रेंड के अफेयर के बारे में। इसमें पढ़ाई कहाँ की होगी? आशिकी करने से फुरसत मिलेगी तो ना पढ़ाई करेगी। एग्जाम हॉल में बैठकर हम सबको और परेशान कर रही है।"

देविका घबरा जाती है, लेकिन प्रोफेसर ने देविका के सारे क्वेश्चन शीट को उठाता हज और उसे एक रोल में बनाते हुए देविका से कहता है , "तुम्हारा एग्जाम कैंसिल किया जाता है। निकलो यहाँ से!" ये सुनकर देविका के कदम लड़खड़ा गए , उसका दिल बुरी तरह से काँप गया और आँखें हैरानी से बड़ी हो गई ।

ऐसा नहीं हो सकता है। उसका एग्जाम नहीं कैंसिल हो सकता है। ये उसका आखिरी एग्जाम है और इसी से उसका फ्यूचर डिसाइड होगा। वो ऐसे ही इसे हाथ से नहीं जाने दे सकती । वो तुरंत कहती है, "सर, प्लीज, मेरा यकीन कीजिए, मैंने कुछ नहीं किया है। ये लड़का चीटिंग कर रहा था।"

लेकिन अगले ही पल एग्जामिनर ने बिना उसकी बात पर ध्यान दिए देविका का हाथ पकड़ा और उसे क्लास से बाहर निकालकर क्लास का दरवाजा बंद कर दिया । देविका का दिल मुँह को आ गया था, उसके कदम लड़खड़ा गए थे और वो एकदम से टूट गई थी। वो दीवार के सहारे खड़ी होकर आँसू बहने लगी थी। उसका एग्जाम कैंसिल हो गया, इस बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था। उसके पूरे शरीर के रोंगटे खड़े हो गए थे और दिमाग काम करना बंद कर चुका था। वो सोचने लगी की अब वो इस बारे में घर पर क्या बताएगी? ज़ैन को कितनी उम्मीदें हैं उससे… धानी ने कितने विश्वास के साथ उसे यहाँ पढ़ने भेजा था, और कृष को उस पर पूरा यकीन था कि देविका अपना एग्जाम बहुत अच्छे से क्लियर करेगी। वो अपने परिवार की सारी उम्मीदें ऐसे नहीं तोड़ सकती ।

वहीं किसी का एग्जाम कैंसिल हो गया है, ये बात कोई छोटी बात नहीं होती । इसलिए ये बात धीरे-धीरे करके पूरे कैंपस में फैल रही थी। हर एग्जामिनेशन हॉल में इसी बात को लेकर बातें होने लगी थी, क्योंकि यूनिवर्सिटी ग्रुप में इस बात को पोस्ट कर दिया गया था कि एक लड़की चीटिंग करते हुए पकड़ी गई है, जिसकी वजह से उसका एग्जाम कैंसिल हो गया है।

वहीं दूसरी तरफ,

सार्थक भी अपना एग्जाम क्लियर कर रहा था। सिर्फ एक घंटा बचा था एग्जाम पूरा होने के लिए। लेकिन उसके क्लास में जो प्रोफेसर था, जब उन्हें इस बात का पता चला तो वो सारी क्लास को फोकस करते हुए कहते हैं, "क्लास, हमारी यूनिवर्सिटी में एक एग्जामिनेशन हॉल में एक लड़की चीटिंग करती हुई पकड़ी गई है और उसका एग्जाम कैंसिल हो गया है। इसलिए आप में से कोई भी चीटिंग करने की कोशिश भी मत करना।"

सार्थक ने उनकी बात सुनी और फिर वापस से अपना एग्जाम लिखने लगा। उसे क्या पड़ी है चीटिंग करने की? उसने और देविका ने बहुत अच्छे से पढ़ाई की है।

तभी एक स्टूडेंट ने पूछा, "वैसे सर, कौन है वो लड़की जिसका पेपर कैंसिल हो गया है?"

"अकाउंट्स एंड बिजनेस की एक स्टूडेंट है, उसका नाम है देविका मालवीय।"

प्रोफेसर ने जैसे ही देविका का नाम लिया, सार्थक के हाथ रुक जाते हैं और उसकी आँखें स्थिर हो जाती हैं, कान एकदम खड़े हो जाते हैं। वो एकदम से प्रोफेसर को देखकर कहता है, "क्या नाम बताया सर आपने उसका?"

प्रोफेसर फिर से कहता है, "देविका मालवीय।"

ये नाम सुन सार्थक का दिल एकदम से जकड़ जाता है। वो अपने पैन को वहीं पर फेंक देता है और तुरंत खड़ा होते हुए एग्जामिनेशन हॉल से भाग जाता है। वो भागते हुए अपनी बिल्डिंग से नीचे उतर रहा था। न तो उसने अपना क्वेश्चन पेपर सबमिट किया था और न ही उसने अपना एग्जाम क्लियर किया था। वो अपना एग्जाम बीच में ही छोड़कर चला गया था। सब लोग हैरान हो गए कि अचानक से सार्थक ने अपना एग्जाम बीच में क्यों छोड़ दिया? उसकी आंसर शीट, क्वेश्चन पेपर्स, पानी की बोतल—सब कुछ उसके डेस्क पर ऐसे ही रखी हुई थी।

लेकिन वो जल्दी से भागता हुआ देविका के बिल्डिंग में आता है, जहाँ उसका एग्जामिनेशन हॉल था। वो जैसे ही उस जगह पर पहुँचता है, उसके कदम रुक जाते हैं। देविका सामने ही थी और घुटनों के बल अपने एग्जामिनेशन हॉल के बाहर बैठी हुई थी।

उसका पूरा चेहरा आँसुओं से भरा हुआ था और बाल पूरी तरह से बिखर गए थे। उसकी नाक से भी पानी आ रहा था और अब ऐसा लग रहा था जैसे कि वो अपने होश में नहीं है। सार्थक भागता हुआ देविका के पास आता है और उसके सामने घुटनों के बल बैठ जाता है। उसने धीरे से देविका के कंधे पर हाथ रखा। देविका धीरे से अपना चेहरा उठाती है।

उसका हताशा से भरा चेहरा जैसे ही सार्थक को नजर आता है, उसका दिल पूरी तरह से जकड़ जाता है। क्योंकि अगले ही पल सार्थक ने देविका को गले से लगा लिया जिससे देविका खुद को संभाल नहीं पाती है। वो सार्थक के शर्ट को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड़ती है और जोर-जोर से रोने लगती है। वो रोते हुए कहती है, "मैंने चीटिंग नहीं कि… मैंने चीटिंग नहीं कर सकती हूँ… मैंने मेहनत से पढ़ाई की है… तुमने देखा था ना कि मैं मेहनत से पढ़ाई की है… तो फिर ये लोग क्यों कह रहे हैं कि मैंने चीटिंग की है…?"

सार्थक का दिल जोरों से धड़क रहा था, उसे गुस्सा भी बहुत आ रहा था। उसने देविका को संभाला, उसके बालों को सहलाया। वो देविका के चेहरे को अपने सीने से हटाता है और उसके आँसू साफ करता है। उसने तुरंत देविका का हाथ पकड़कर उसे खड़ा किया और उसके आँसू साफ करते हुए उसने कहा, "चलो, मेरे साथ।"

सार्थक देविका को खींचता हुआ सीधे अपने साथ प्रिंसिपल रूम में लेकर आता है, जो खुद अभी-अभी इस न्यूज़ को यूनिवर्सिटी कैंपस ग्रुप में पढ़ रहे थे और वो खुद हैरान हो गए थे।

सार्थक बिना नॉक किए हुए सीधे प्रिंसिपल के ऑफिस में आता है और उनके सामने खड़े होते हुए कहता है, "सर, देविका ने चीटिंग नहीं की है, वो चीटिंग कर ही नहीं सकती है। जरूर कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग हुई है। आप प्लीज इस केस को बहुत सीरियसली हैंडल कीजिए। आप समझ नहीं रहे हैं, ये एग्जाम हम लोगों के लिए कितना जरूरी है!"

प्रिंसिपल सर देविका और सार्थक दोनों को ही अच्छी तरह से जानते थे। देविका के पिता मिस्टर ज़ैन मालवीय ने इस यूनिवर्सिटी को बहुत बड़ा डोनेशन दिया था ये बात सार्थक को पता थी क्योंकि उसके पिता ने भी यूनिवर्सिटी को बहुत बड़ा डोनेशन दिया था । और अब यहाँ इस तरीके से ज़ैन मालवीय बेटी का नाम सामने आना ये बहुत बड़ी बात है।

हालाँकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था और देविका हमेशा से अच्छे रिजल्ट ही लाई हैं, तो ऐसा हो ही नहीं सकता है कि वो चीटिंग करे, वो भी अपने फाइनल एग्जाम में। देविका इस बात से बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी। इसलिए प्रिंसिपल सर ने उसे आराम से बिठाया और कहा, "मैं इस केस की डिटेल में तहकीकात करूँगा।"

अब एग्जाम खत्म होने की बेल भी बज जाती है और सबका एग्जाम खत्म हो गया था। लेकिन प्रिंसिपल सर ने उस प्रोफेसर को और देविका से जुड़े हर केस की लीड को अपने केबिन में बुला लिया था ताकि वो इसकी तह तक पहुँच सके । और अब जब प्रोफेसर ने जब नोहा को एग्जाम के बाद रुकने के लिए कहा तो नोहा थोड़ा सा डर जाता है।

हालाँकि उसने देविका के क्वेश्चन पेपर से उसने अपना 50% एग्जाम तो लिख लिया था, लेकिन अब उसे घबराहट हो रही थी, क्योंकि सारे बच्चे वहाँ से एक-एक करके जा रहे थे, पर नोहा को रोक लिया गया था।इसलिए जैसे ही सारी क्लास खाली हो जाती है, प्रोफेसर सारे पेपर कलेक्ट करते हुए नोहा से कहते है , "नोहा, तुम्हें और मुझे प्रिंसिपल रूम में जाना है।"

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