आज पूरी मुंबई में बस दो ही चर्चाएँ थीं; मीडिया से लेकर अखबारों के फ्रंट पेज तक, हर जगह एक ही बात का जिक्र था: पहली, द रॉकस्टार अग्नि सभरवाल का लाइव कंसर्ट कल रात होटल पैराडाइज में होगा; और दूसरी चर्चा इस बात की थी कि उसके दूसरे दिन अग्नि सभरवाल की शादी उनकी मंगेतर और लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड निशा भसीन के साथ होगी।
अग्नि और निशा बचपन के दोस्त थे। जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही दोनों को एक-दूसरे के प्रति आकर्षण हुआ; धीरे-धीरे यह आकर्षण प्यार में बदल गया। दोनों के परिवार वाले भी एक-दूसरे से अच्छे ताल्लुकात रखते थे; इसीलिए उन दोनों को निशा और अग्नि के रिश्ते से कोई एतराज नहीं हुआ।
पर अग्नि पहले अपनी ज़िंदगी में कुछ करना चाहता था, एक मुकाम हासिल करना चाहता था। हाँ, सभरवाल बिजनेस था, उसके पास; पर वह बिजनेस उसका अपना नहीं था, उसके दादा और पापा की कड़ी मेहनत थी। अग्नि को अपने दम पर कुछ करना था, कुछ ऐसा जिससे दुनिया उसे सिर्फ़ उसके नाम से पहचाने, ना कि उसके पापा और दादा के नाम से। अग्नि के पास हुनर के नाम पर बस उसकी आवाज़ थी, और अग्नि ने उसी को अपना हथियार बनाया।
छोटे-मोटे कंसर्ट से शुरू करके अग्नि ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। आज अग्नि इंडिया के टॉप 10 मोस्ट रॉकस्टार में से एक था। उसके एक कॉन्सर्ट की टिकट लाखों में बिकती थी; यहाँ तक कि उसकी टिकटें आने से पहले ही एडवांस बुकिंग में चली जाती थीं। आखिर हो भी क्यों ना? अग्नि की आवाज़ में जादू ही ऐसा था!
अग्नि के स्टूडियो के सामने लाखों की तादाद में भीड़ थी; सब अग्नि की एक झलक पाने के लिए तरस रहे थे। लड़कियाँ अपने हाथ में अग्नि की फ़ोटो और उसके नाम का बोर्ड लेकर खड़ी थीं।
तभी वहाँ पर तीन गाड़ियों का काफ़िला आया, जिनमें से बॉडीगार्ड बाहर आए। वहाँ का स्टाफ़ भी रिपोर्टर्स और अग्नि के फ़ैंस को काबू करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वे किसी के काबू में ही नहीं आ रहे थे।
मीडिया की लाइट्स लगातार उस गाड़ी पर पड़ रही थीं, और लड़कियों की अग्नि के लिए दीवानगी साफ़ नज़र आ रही थी।
बॉडीगार्ड ने जल्दी से गाड़ी को कवर किया, और एक बॉडीगार्ड ने गाड़ी का दरवाज़ा खोला।
डेनिम जींस, ब्लैक शर्ट और लेदर जैकेट के साथ, अपने चेहरे पर सनग्लासेस लगाकर, एक 26 साल का लड़का गाड़ी से बाहर निकला।
6 फ़ीट हाइट, बाल जेल से सेट किए हुए, एक कान में डायमंड कफ़, चश्मों की वजह से उसकी भूरी आँखें किसी को दिख नहीं रही थीं; पर गले में पहना हुआ गिटार का लॉकेट यह बताने के लिए काफ़ी था कि उनके सामने उनका सुपरस्टार खड़ा था। पर क़यामत तो कुछ और ही निकली; अग्नि की मुस्कराहट से गालों में पड़ने वाले डिम्पल…
हाय! लाखों लड़कियाँ उस डिम्पल पर अपनी जान वार देती थीं।
अग्नि मुस्कुराते हुए अपने फ़ैंस को देखकर एक हाथ हिलाता है; इसी के साथ वहाँ पर सारी लड़कियाँ चीखने लगीं। रिपोर्टर्स और मीडिया वाले सवाल पर सवाल कर रहे थे, लेकिन बॉडीगार्ड अग्नि को लेकर अंदर जाने लगे।
जैसे ही अग्नि गेट के अंदर पहुँचा, एक फ़ैन ने जोर से चिल्लाते हुए कहा, "आई लव यू अग्नि! अगर तुम मुझे नहीं मिले तो मैं अपनी जान दे दूँगी!"
यह आवाज़ लाखों की आवाज़ में अग्नि के कानों तक पहुँच गई, और वह दरवाज़े तक जाने से पहले ही रुक गया।
बॉडीगार्ड अग्नि को अंदर चलने के लिए रिक्वेस्ट करने लगे, लेकिन अग्नि ने हाथ दिखाकर उन्हें रोक दिया। अग्नि पलटता है और अपना चश्मा निकालता है।
अग्नि अपनी भूरी आँखों से उस भीड़ को देख रहा था, और जैसे ही अग्नि ने अपना चश्मा निकाला, सारी भीड़ उसे देखकर जोर से चीखने लगी।
अग्नि ने उस लड़की की तरफ़ देखा जहाँ से यह आवाज़ आई थी। उसने मुस्कुराते हुए उन लड़कियों को देखा और कहा, "बेब्स, 100 अग्नि आएंगे और 100 अग्नि जाएँगे, पर तुम्हारी ज़िंदगी बहुत कीमती है। प्लीज़ किसी के लिए भी अपनी ज़िंदगी को दाव पर मत लगाओ। यू लव मी? आई रियली लव यू। जाहिर सी बात है, आप सब हो तो अग्नि है। अगर आपका प्यार, आपका साथ ना मिला होता तो शायद मैं यहाँ तक कभी नहीं पहुँच पाता। इसीलिए मेरी ज़िंदगी में सबसे पहली अहमियत मेरे फ़ैंस की है।"
एक रिपोर्टर ने अग्नि से सवाल किया, "अग्नि जी, एक तरफ़ तो आप कहते हैं कि आप अपनी फ़ीमेल फ़्रेंड से बहुत प्यार करते हैं, और दूसरी तरफ़ आप शादी करके उनका दिल तोड़ रहे हैं?"
अग्नि ने हँसते हुए कहा, "जी नहीं, मैं किसी का दिल नहीं तोड़ रहा, बल्कि मेरा दिल तो इन सबके पास है। पर जहाँ तक बात रही मेरी शादी की, तो वह मेरा फैमिली मैटर है, मेरी पर्सनल लाइफ़ का हिस्सा है। जाहिर सी बात है, मैं अपने फ़ैंस से प्यार तो करता हूँ, लेकिन मैं सबके साथ शादी तो नहीं कर सकता ना! लेकिन फिर भी, शादी के बाद भी मेरे फ़ैंस मेरी फ़र्स्ट प्रायोरिटी रहेंगे।"
दूसरे रिपोर्टर ने सवाल किया, "अग्नि जी, दो दिन बाद आपकी शादी है और कल आपका कॉन्सर्ट है; आप दोनों चीज़ें एक साथ कैसे मैनेज करेंगे?"
अग्नि ने न्यूज़ रिपोर्टर के सवाल का जवाब दिया, "दोनों चीज़ें मुझे नहीं मैनेज करनी हैं। कॉन्सर्ट की डेट एक साल पहले ही डिसाइड हो चुकी थी, इसलिए मैं उसे बदल नहीं सकता। और शादी की डेट ग्रह-नक्षत्र और पंडितों ने मिलकर डिसाइड की है। और मेरे घर में, कोई कितना ही क्यों ना बड़ा बिज़नेसमैन हो, लेकिन घर में चलती लेडीज़ की ही है। फ़िलहाल के लिए, मेरे घर की हेड ऑफ़ द फ़ैमिली मेरी दादी हैं, और मेरी दादी का कहना है कि शादी इसी डेट पर हो, और मेरे लिए मेरी दादी के शब्द पत्थर की लकीर हैं।"
कोई और रिपोर्टर कुछ सवाल करता इससे पहले ही बॉडीगार्ड ने आकर हाथ दिखाकर बोला, "नो मोर क्वेश्चंस!"
इसी के साथ अग्नि ने अपना एक हाथ उठाया और अपने होठों से लगाते हुए उन लड़कियों की तरफ़ एक फ़्लाइंग किस कर दिया।
बस उसका इतना ही करना बाक़ी था कि लड़कियाँ पागल हो गईं और वह भीड़ को हटाने की कोशिश करने लगीं। जब बॉडीगार्ड ने उन्हें ऐसा करते देखा, तो जल्दी से दरवाज़ा खोलकर अग्नि को अंदर ले गया।
अग्नि अपने स्टूडियो जा चुका था। जाहिर सी बात है, कल उसका कॉन्सर्ट था; उसके पास काम बहुत था, और उसकी शादी की सारी प्रिपरेशन उसकी फ़ैमिली कर रही थी; उसे तो बस शेरवानी पहनकर मंडप में ही बैठना था।
वहीं टीवी पर अग्नि का यह इंटरव्यू चल रहा था। अपने हाथों में मेहँदी लगाई, अपनी आँखों में टिमटिमाहट लिए, 23 साल की निशा इस इंटरव्यू को देख रही थी।
अग्नि के इंटरव्यू ख़त्म होने के बाद निशा ने टीवी को घूरते हुए कहा, "अरे बड़े फ़ैंस को पहले रखने वाले! एक बार शादी हो जाने दो, जितना तुमने मुझे शादी से पहले परेशान किया ना, शादी के बाद गिन-गिन कर बदला लूँगी! एक मुलाक़ात के लिए महीना इंतज़ार किया है मैंने तुम्हारा! पहले तो बड़े-बड़े वादे किए थे, 'निशा, तुम्हारे लिए यह कर दूँगा, तुम्हारे लिए वह कर दूँगा,' और जब करने की बारी आई तो मेरी फ़ैंस पहले हैं? हम्म…"
ऐसा कहते हुए निशा ने अपना मुँह बिठा दिया; लेकिन दरवाज़े पर खड़ी निशा की माँ, रजनी जी, निशा को देखकर हँसने लगीं और कहा, "क्या बात है निशा? दामाद जी से क्यों गुस्सा हो रही है?"
निशा ने अपनी माँ को देखकर कहा, "माँ, आप मेरी माँ हो, तो ख़ामख़ा उसकी साइड मत लेना! वह पागल, शादी के एक दिन पहले भी कम कर रहा है! आपको पता है, जब से हमारी शादी तय हुई है ना, वह मुझे एक बार मिल भी नहीं रहा है! बस फ़ोन पर बातें करता है, वह भी सिर्फ़ काम की! 'निशा, तुमने खाना खाया?', 'निशा, कल तबीयत ख़राब थी, तुमने दवाई ली?', 'निशा, बाहर धूप कितनी तेज़ हो रही है, बाहर क्यों निकल रही हो?' बस यही सारी बातें बोलता है! पागल कहीं का!"
रजनी जी मुस्कुराते हुए आगे आती हैं और निशा के हाथों की मेहँदी देखने लगती हैं, जो ऑलमोस्ट सूख चुकी थी।
रजनी जी मुस्कुराते हुए कहती हैं, "बेटा, वह रॉकस्टार है; उसके पास कितना काम है! फिर भी वह अपने काम के बीच में से समय निकालकर तुमसे बात करता है, और तुम मुझसे ऐसे नाराज़ हो रही हो! बेटा, शादी से पहले ही ऐसे नाराज़ होगी तो शादी के बाद ज़िंदगी कैसे कटेगी?"
निशा कुछ कहने ही वाली होती है कि तभी रजनी जी का फ़ोन बजता है। रजनी जी देखती हैं; सभरवाल मेंशन से फ़ोन है।
जल्दी से फ़ोन उठाते हुए कहती हैं, "जी, बहन जी… अच्छा… हाँ, ठीक है… नहीं, बस इसकी मेहँदी सूख रही है, हम उसके बाद हल्दी के लिए निकलने वाले हैं…"
रजनी जी फ़ोन रखते हुए निशा को देखकर कहती हैं, "तेरी सास का फ़ोन था; कह रही थी हम लोग हल्दी के लिए कब निकल रहे हैं।"
निशा मुँह बनाते हुए कहती है, "हम तो चले जाएँगे, पता नहीं वह पागल पहुँचेगा या नहीं!"
रजनी जी निशा के सर पर एक चपत लगाते हुए कहती हैं, "तमीज़ से बात कर ले! तेरा होने वाला पति है! तेरा बचपन का दोस्त नहीं रहा, जिसे तू कभी भी उलझ पड़ती थी, लड़ पड़ती थी; वह तेरा पति है; तुझे उसे इज़्ज़त देनी चाहिए; उसके साथ प्यार से और इज़्ज़त से बात कर। और हाँ, थोड़े अपने नख़रे कम दिखा; शादी होने वाली है तेरी; किसी के घर की बहू बनने वाली है।"
निशा कहती है, "लेकिन माँ, मुझे तो ऐसा लग ही नहीं रहा कि मैं उसके घर की बहू बनने वाली हूँ! मतलब मैं तो वहाँ पर कितनी बार गई हूँ, उन लोगों से मिली भी हूँ; इसलिए मुझे शादी वाली फ़ीलिंग ही नहीं आ रही है! और अग्नि के साथ तो इज़्ज़त से बात करने पर मुझे हँसी आ जाती है! पर मैंने कोशिश की थी; उसे 'आप' बोलने की; थोड़ी देर तक तो हम दोनों हँसते रहे; मेरे मुँह से उसके लिए 'आप' निकलता ही नहीं है!"
रजनी जी अपना सर पीट लेती हैं; कहाँ वह अपनी इस पागल बेटी को समझने बैठ गई हैं! पर उन्हें खुशी थी कि निशा की शादी अग्नि से हो रही है, और वह उस परिवार में जा रही है जिन्हें वह अच्छी तरह से जानती हैं।
दूसरी तरफ़, सभरवाल मेंशन में…
घर की मुखिया थीं गुड्डी सभरवाल; उनके पति प्रदीप सभरवाल सालों पहले गुज़र गए थे।
अपने पिता के गुज़र जाने के बाद बिज़नेस प्रदीप सभरवाल के बेटे मोहन सभरवाल ने संभाला था। सभरवाल का बिज़नेस जितनी ऊँचाइयों पर था, उनकी पहचान उतनी ही बड़ी थी, और इस पहचान को चार चाँद लगाया अग्नि ने था।
मोहन जी ने कभी भी अग्नि को कुछ करने से नहीं रोका था; उन्हें पता था अग्नि के नाम की तरह उसके अंदर भी एक आग है, कुछ कर गुज़रने की आग; इसलिए उन्होंने अग्नि को उसका मन करने दिया था। आज जब कोई उन्हें यह कहता था कि आप तो रॉकस्टार अग्नि के पिता हैं, तो मोहन जी का सर गर्व से ऊँचा हो जाता था कि दुनिया उन्हें उनके बेटे के नाम से जानती है।
मोहन जी की धर्मपत्नी थीं वीणा सभरवाल; स्टाइलिश, टिप-टॉप और मॉडर्न सोसाइटी में रहने वाली वीणा सभरवाल, जिन्हें हर चीज़ हाई-क्लास ही पसंद आती थी। पहले पति का इतना बड़ा बिज़नेस और अब बेटे का इतना बड़ा नाम; वीणा सभरवाल की तो सोसाइटी में चाँदी ही चाँदी थी।
पर वीणा जी जितनी अपने परिवार और फैमिली के लिए मॉडर्न क्यों ना रही हों, लेकिन वह उनसे उतना ही प्यार करती थीं, और अग्नि में तो उनकी जान बसती थी।
सोसाइटी पार्टी और किटी पार्टी में कई लड़कियों की माँ ने वीणा को रिझाने की कोशिश की थी ताकि वह अपनी बेटी को अग्नि के साथ जोड़ सकें; पर वीणा जी को अच्छे से पता था कि अग्नि सिर्फ़ निशा से प्यार करता है; इसीलिए उन्होंने इस बात को उठने से पहले ही दबा देती थीं।
वीणा जी सुबह की पहली कप भी ब्रांडेड ही करती थीं, और उनकी साड़ियों का कलेक्शन तो ऐसा था कि एक साड़ी एक बार पहन ली तो दोबारा उसे हाथ तक नहीं लगती थी।
सभरवाल परिवार बहुत खुश था कि आखिर उनके इकलौते बेटे की शादी उसकी पसंद की लड़की से हो रही है। सभरवाल्स का जितना ज़्यादा नाम था, उतना ही ज़्यादा नाम और रुतबा इस शहर में भसीन परिवार का भी था।
निशा के पिता, मिस्टर जोगिंदर, और अग्नि के पिता, मिस्टर मोहन, अक्सर बिज़नेस पार्टियों में साथ ही जाया करते थे; वे दोनों एक-दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त भी थे।
सभरवाल मेंशन को बहुत ही खूबसूरत तरीके से सजाया गया था; बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा हुआ था; वे इस घर की तस्वीरें अलग-अलग एंगल से ले रहे थे। गार्डन को पूरा पीले रंग से सजा दिया गया था क्योंकि आज यहाँ पर हल्दी का फंक्शन था।


















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